Aapki Vijay

Aapki vijay kisi ka hridaya jeetane main hai uska apmaan karne main nahin..................

Saturday, July 11, 2009

श्रद्धा

१-दुनिया ने चढायें फूल तुझे मै ख़ुद को चढाने आया हूँ
तेरे चरण कमल की रज को माथे से लगाने आया हूं

यदि तू चाहे ठुकरा दे मुझे यदि तू चाहे अपना ले मुझे
तेरे राम नाम की धुन पर अभिमान चढाने आया हूँ.
जिस कारण मै जग मैं आया सब भुला कुछ न कर पाया
मैं छोड़ के सभी झमेलों को चरणों मैं सामने आया हूँ
ओ जग के पालक संचालक तुम क्षमा करो मेरी भूलों को
जीवन मैं लगे है दाग बहुत वो दागछुड़ाने आया हूँ
हो प्रेम दया के सागर तुम मेरे अवगुण चित न धरो
तेरे चरणों मै बहती गंगा चरणामृत लेने आया हूँ.

२- राम चरित मानस
http://ramayan.wordpress.com/2006/07/24/main/





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