दुःख भी मानव की सम्पति है, फ़िर क्यों इस से घबडाता है,
दुःख आया है तो जाएगा , सुख आया है तो जाएगा सुख जाएगा,
सुख जाएगा तो दुःख देकर, और दुःख जाएगा तो सुख देकर,
सुख देकर जाने वाले से, हे मानव क्यों भय खता है,
दुःख भी मानव की, सम्पति है फिर क्यों इस से घबडाता है।।
सुख मैं सब भूले रहते है, दुःख सबकी याद दिलाता है,
सुख के आगे जो सिहर उठे उनको इतिहास न जान सका,
दुःख सहकर, ज्वाला मैं जलकर ही सोने का तेज चमकता है,
दुख की इस कड़ी कसौटी पर ये मानव परखा जाता है,
दुःख भी मानव की, सम्पति है फ़िर क्यों इस से घबडाता है,
रोबिर्त रझद्येस्तविंस्की
10 hours ago



