Aapki Vijay

Aapki vijay kisi ka hridaya jeetane main hai uska apmaan karne main nahin..................

Thursday, August 6, 2009

आशावादिता- जीवन के आनंद के लिए आवश्यक -2

मनुष्य की आशा काफी हद तक उसके जीवन दर्शन पर निर्भर करती है।
कैसे?, जो मनुष्य जैसा सोचता है उसके विचार भी उसी स्तर के होते है। यदि कोई निम्न स्तर के विचारों मैं धंसा हुआ है, तो उसकी सोच भी निम्न स्तर कि ही होगी। अच्छे विचारों और अच्छी संगतिकरने पर ही कोई भी अपने जीवन और विचारों को उच्च स्तर पर ले जा सकता है। कोई जो सदविचार और उच्च विचारों वाले सज्जन लोगों के साथ मैं रहेगा तो उसका मन भी आशा का संचार होगा और वह जीवन मैं आने वाली हर सम- बिषम परिस्थिति के लिए तैयार रहेगा, जो की एक सफल मनुष्य की पहचान है। भरोसा रखो सब ठीक होगा ............




आशा से जीवन प्रत्यासा मैं वृद्धि होती है!



आशा के मन मै होने पर मनुष्य की जीवन जीने की चाहत

मै वृद्धि हो जाती है , उसे जीने का कोई न कोई कारण या रास्ता मिल ही जाता है!

जैसे रेगिस्तान मैं चल रहे प्यासे पथिक को यदि कही से जल की शीतलता लिए हुए समीर का झोंका आ जाए तो जल को प्राप्त करने के लिए उसके क़दमों की गति भी बढ़ जाती है।

ठीक ऐसे ही जीवन मैंने आशा को कभी शिथिल नहीं होने देना चाहिए।

इसे कहते है जीना .............................................

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