मानव हूँ , मानव सी क्या मुस्कान नहीं है काफी,
और शक्ल, रूप, बोली की क्या पहचान नहीं है काफी,
जाति पूछ कर क्यों भाई को शर्मिंदा करते हो,
क्या मेरा होना केवल इंसान नहीं है काफी॥
कॉस्मॉस / क्रिस्तीना लेनकोव्स्का / संगीता गुप्ता
17 hours ago

Well said
ReplyDeleteBahut Khoob..
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