Aapki Vijay

Aapki vijay kisi ka hridaya jeetane main hai uska apmaan karne main nahin..................

Wednesday, August 26, 2009

मुक्तक -2

मानव हूँ , मानव सी क्या मुस्कान नहीं है काफी,
और शक्ल, रूप, बोली की क्या पहचान नहीं है काफी,
जाति पूछ कर क्यों भाई को शर्मिंदा करते हो,
क्या मेरा होना केवल इंसान नहीं है काफी॥

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