Aapki Vijay

Aapki vijay kisi ka hridaya jeetane main hai uska apmaan karne main nahin..................
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Friday, July 31, 2009

आशावादिता - जीवन के आनंद के लिए आवश्यक -1

जीवन और आशा मेरे विचार मैं एक दुसरे के पूरक हैं।

एक का अस्तित्व पर ही दुसरे का अस्तित्व निर्भर है। क्योंकि यदि जीवन है तो कुछ आशा तो जरूर होगी! और यदि आशा है तो जीने की चाहत होगी!



जीवन मैं जीवन्तता एवं जीवन का आनंद लेने के लिए आशावादी होना परम आवश्यक है।

अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि रॉबर्ट ब्रव्निंग अपने कव्य मैं बहुत ही आशा का संचार करते है-
अपनी एक कविता "The Last Ride" मैं वे अपनी प्रेयसी जो उनके प्रणय निवेदन को अस्वीकार कर चुकी है से केवल आखिरी बार अपने साथ बग्घी मै सवारी को राजी कर लेते है। अपनी इस कार्य को वे आंकते हैं और कहते है -
"कोई मुझे मुर्ख मान सकता है जो प्रेम को अस्वीकार करने वाली
स्त्री के लिए मारा जा रहा है। पर वे कहते है की हालात अभी ज्यादा
ख़राब नहीं है। यदि ऐसा होता तो वो उन्हें मना कर सकती थी। पर
उसने ऐसा न कर के ये दर्शा दिया है की वो अभी मेरे लिए कुछ
तो करने ko तैयार है। कितना बुरा होता यदि वो मेरे साथ आखिर
यात्रा से मन कर देती। अब मुझे इस यात्रा कार आनंद मानना है।
और आखिर वो दिन आता है जब वे प्रेमिका के साथ होते है--
यात्रा करते समय दोनों प्रेमी- प्रेयसी ये अनुभब करते है की उन
दोनों ki आत्मा स्वर्ग मैं मिली हुयी हैं। और वे निर्णय करते है की
अब इस यात्रा (जो की उनकी अन्तिम यात्रा मानी जा रही थी) की तरह
सदैव साथ- साथ यात्रा करते रहेंगें।
अतः जीवन मैं प्रतिपल आशावादी बने।
(क्रमशः)